Tuesday, November 30, 2021

कलेक्टर के नाम पर फर्जी आदेश जारी कर मानवाधिकार आयोग में की शिकायत

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रीवा। कलेक्टर के नाम पर फर्जी आदेश जारी कर मानवाधिकार आयोग में शिकायत करने का मामला सामने आया है। उक्त आदेश कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर से जारी हुए और बकायदे उसके आधार पर मानवाधिकार आयोग में शिकायत भी कर दी। हालांकि जांच में उक्त आदेश फर्जी निकले जिसके आधार पर पुलिस ने शिकायतकर्ता के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

कलेक्टर कार्यालय से जारी हुए थे दो आदेश
जिला कलेक्टर कार्यालय से दो आदेश जारी किये गये थे जो शिकायतकर्ता रामबदन साकेत पिता वंशराखन निवासी रिमारी थाना सिरमौर के खिलाफ थे। कलेक्टर के हस्ताक्षर से जारी इन दोनों आदेशों को आधार पर बनाकर उसने मानवाधिकार आयोग में इस पूरे मामले में की शिकायत की जिसमें दोनों आदेशों के अलावा सिविल लाइन थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी अनिमेश द्विवेदी पर मारपीट का आरोप भी लगाया था। कलेक्टर कार्यालय से जारी हुए आदेशों की जांच पुलिस विभाग को मिली जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने इसकी जांच की। जांच में शिकायतकर्ता को भी बुलाया गया जिससे पुलिस ने इन दोनों आदेश कहां से और किस माध्यम से प्राप्त हुए इस संबंध में जानकारी ली गई लेकिन शिकायतकर्ता कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया।

पुलिस ने की पूरे मामले की जांच
पुलिस ने इन आदेशों की जानकारी कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त की तो दोनों आदेश फर्जी निकले। कलेक्टर के हस्ताक्षर से ऐसे आदेश कभी जारी नहीं किये गये बल्कि खुद शिकायतकर्ता ने प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों को फंसाने के लिए फर्जी आदेश बनवाए और उसमें कलेक्टर के हस्ताक्षर भी कर दिये। उसने सिविल लाइन थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी अनिमेश द्विवेदी को भी मारपीट के झूठे मामले में फंसाने का प्रयास किया था। पूरे मामले की बारीकी से जांच के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के जांच प्रतिवेदन के आधार पर सिविल लाइन थाने में आरोपी के खिलाफ 153 (ख), 420, 465, 471 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर तथ्यों को जुटाने में लगी है।

क्या थे दोनों आदेश, स्पष्टीकरण मांगने पर हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
कलेक्टर के नाम पर जारी दोनों आदेश काफी हैरान कर देने वाले थे। पहले आदेश में सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया था कि रामबदन साकेत यदि थाने में रिपोर्ट लिखाने आता है तो उसकी रिपोर्ट न लिखी जाये और उसे भगा दिया जाये। दूसरा आदेश टीआरएस कालेज के तत्कालीन प्राचार्य रामलला शुक्ला के नाम पर था जिनको कलेक्टर ने रामबदन साकेत को जहां भी दिखे उसे गोली मारकर हत्या कर देने के लिए था। पूरा मामला उस समय सामने आयोग जब मानवािधकार आयोग ने इन आदेशों के संबंध में कलेक्टर से स्पष्टीकरण मांगा। तब पूरे मामले की जांच शुरू हुए और फर्जी आदेश जारी करने का मामला सामने आ गया।

तत्कालीन प्राचार्य पर दर्ज कराया था हरिजन एक्ट का मामला
आरोपी रामबदन साकेत ने टीआरएस कालेज के तत्कालीन प्राचार्य के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। वह बीए तृतीय वर्ष का था और उसने प्राचार्य पर मारपीट करने व जातिगत अपमानित करने का आरोप लगाते हुए सिविल लाइन थाने में शिकायत की थी जिस पर पुलिस ने वर्ष 2019 में मामला दर्ज किया था। पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच की। मौके पर मौजूद साक्ष्यिों के बयान लिये गये और लोगों से पूछताछ की गई लेकिन मारपीट के कोई साक्ष्य सामने नहीं आए। करीब दो साल तक पुलिस ने हर तरह से इस मामले की जांच की और अब इसमें खारजी काट दी है जिसे जल्द न्यायालय में पेश किया जायेगा।

जांच के बाद दर्ज हुआ प्रकरण
इस संबंध में जांच पुलिस विभाग को मिली थी जिसमें कलेक्टर के नाम पर दो आदेश जारी करने से संबंधित थी। जांच में उक्त आदेश फर्जी निकले जो कलेक्टर कार्यालय से जारी नहीं किये गये थे। आरोपी ने खुद फर्जी आदेश तैयार करके मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी। पूरा मामला सामने आने पर आरोपी के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।
राकेश कुमार सिंह, एसपी रीवा

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