Tuesday, November 30, 2021

मध्यप्रदेश के कालेजों की जनभागीदारी समितियों में 25 साल बाद होगा ढांचागत बदलाव

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रीवा। कालेजों में जनभागीदारी समितियों में ढांचागत बदलाव की तैयारी की जा रही है। इसके लिए शासन स्तर पर प्रारूप तैयार किया गया है और उस पर लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। जनभागीदारी समितियों के गठन को लेकर जारी 1996 की अधिसूचना में संशोधन किया गया है।

नए संशोधन के तहत जिले के अग्रणी महाविद्यालयों की जनभागीदारी समितियों में क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक और संबंधित महाविद्यालय के प्राचार्य को समिति का उपाध्यक्ष मनोनीत किया जाएगा।

जिला स्तर पर कलेक्टर द्वारा नामांकित प्रतिनिधि, ब्लाक-तहसील स्तर पर एसडीएम द्वारा नामांकित प्रतिनिधि को नियुक्त किया जाएगा। जनभागीदारी समितियों के संचालन को लेकर बनाए गए नियमों में कई बिन्दुओं को संशोधित किया है और कहा गया है कि अब इन समितियों को और सशक्त बनाया जाएगा। समिति में स्नातक या स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष के छात्र-छात्रा को प्रतिनिधि बनाए जाने के लिए कहा गया है।

समितियों का पंजीयन नवीनीकरण हर साल किए जाने के लिए कहा गया है ताकि आय-व्यय के मामलों में आयकर से मिलने वाली छूट का लाभ लोगों को मिल सके।

– प्रस्तावों के क्रियान्वयन पर निगरानी करेंगे अतिरिक्त संचालक

जनभागीदारी समितियों द्वारा कालेजों के विकास को लेकर लिए जाने वाले निर्णयों पर क्रियान्वयन समय पर नहीं हो पाता है। जिससे छात्रों के हितों की अनदेखी होती है। साथ ही संस्था का हित भी प्रभावित होता है। यह जनभागीदारी समिति की मूल भावना के विपरीत है। अब निर्णयों के क्रियान्वयन को लेकर क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक निगरानी करेंगे। बैठकों में पूर्व के प्रस्तावों के क्रियान्वयन को लेकर भी अलग से चर्चा होगी।

दानदाताओं के नाम की लगेगी शिलापट्टिका
कालेजों में जनभागीदारी समिति को दान करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए कार्य किया जाएगा। कालेज को वस्तु, उपकरण आदि देने वाले लोगों के नाम शिलापट्टिका में दर्ज किए जाएंगे। साथ ही पांच लाख रुपए से अधिक के दानदाताओं का नाम उच्च शिक्षा आयुक्त को भेजा जाएगा। ऐसे दानदाताओं को मुख्यमंत्री से सम्मानित कराया जाएगा ताकि अधिक संख्या में लोग दान करने के लिए आगे आएं।

वित्तीय अधिकार भी बढ़ाए
आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के तहत जनभागीदारी समितियों को सशक्त बनाने के लिए कई संशोधन किए गए हैं। जिसमें समिति के सचिव संस्था प्राचार्य को आकस्मिक मद में ५० हजार रुपए व्यय करने के अधिकार को बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दिया गया है। अधोसंरचना विकास के लिए निर्माण कार्यों में ५० लाख रुपए तक की वित्तीय अधिकार की सीमा निर्धारित है। इसे बढ़ाकर एक करोड़ रुपए किया गया है।
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कालेजों में जनभागीदारी समिति व्यवस्था का पुनर्विलोकन प्रारूप जारी किया गया है। इसमें सुझाव भी मांगे गए हैं। प्रारूप का अभी पूरा अध्ययन नहीं कर पाया हूं। देखने के बाद शासन के जो भी निर्देश हैं उसके अनुसार कार्रवाई करेंगे।
डॉ. पंकज श्रीवास्तव, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा

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