Sunday, December 5, 2021

रीवा-धीरे धीरे ज्वाला बन सुलग रही पृथक विंध्यप्रदेश की चिंगारी

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धीरे धीरे ज्वाला बन सुलग रही पृथक विंध्यप्रदेश की चिंगारी
रीवा जनहित में जो ठान लिया वह करना है इसे कहते है जूनून और इसमें कोई सक या सूबा नहीं कि नारायण त्रिपाठी एक जुनूनी नेता है जो ठान लेते है वह करके रहते है फिर हानि हो या लाभ पलट के नहीं देखते मतलब प्राण जाय पर वचन न जाय और उनकी इसी फ़िदा पर मैहर क्षेत्र की जन मानष फ़िदा रहती है और सायद इसी का परिणाम है कि उनके विरोध में चुनावी समर में फिर कितना बड़ा धुरंधर क्यों न आ जाय जीत उन्ही की होती है न जातपात काम आती न कोई दल वहा जनता के लिए एक ही दल और जाती रहती है नारायण त्रिपाठी और कोई नहीं सायद इसी की बदौलत चार बार अलग अलग दल से क्षेत्र की जनता ने उन्हें सिरमौर बना विधान परिषद् तक पहुचाया और आगे भी पहुँचाती रहेगी। नारायण त्रिपाठी के चोरहट के आगाज से सरकार का सिंहासन डोल उठा परिणामतः प्रथक विंध्य को लेकर सतना में आयोजित होने वाले कार्यक्रम की अंदरुनी रिपोर्टिंग प्राप्त कर करोना की आड़ लेकर कार्यक्रम को रोकने का हथकंडा अपनाया पर सायद सरकारो में बैठे,जिम्मेवार इसबात को भूल रहे है कि अब यह आंदोलन नारायण त्रिपाठी का नहीं बल्कि विंध्य के जन जन का आंदोलन बन चुका है जिसपर बंदिसो की बेड़िया बहुत दिनतक नहीं पहनाई जा सकती जितना जन की आवाज को बाधने रोकने का प्रयास किया, ये चिंगारी उतना ही विकराल रूप लेगी जिसे रोकपाना किसी भी सरकार के बूते की बात नहीं रह जायेगी क्योकि ये जनता है जब जागती है तो नया सबेरा अपने आप होने लगता है। विंध्य प्रथक क्यों जरुरी है यह बात विंध्य का बच्चा बच्चा अब जानने लगा है जिस दिन हुंकार भरेगा सरकारो ले लिए गले की हड्डी जरूर बनेगा।
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