Tuesday, November 30, 2021

रीवा-निरंजन मेडिकल संचालक के द्वारा पत्रकार के ऊपर जानलेवा हमला

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48 घंटा बीत जाने के बाद भी मारपीट करने वाले आरोपी के खिलाफ समान थाने के पुलिस ने नहीं दर्ज की fir*
#आर_टी_न्यूज़ 
*पत्रकार ने निरंजन मेडिकल के संचालक पर लगाया कोरेक्स व नशीली टैबलेट बेचने का आरोप*
रीवा जिले के पत्रकार मुकेश त्रिपाठी जो पेशे से पत्रकार है और अपनी दुकान भी नए बस स्टैंड निरंजन मेडिकल के बगल में संचालित किए हुए है पीड़ित पत्रकार मुकेश त्रिपाठी ने  निरंजन मेडिकल संचालक पर मारपीट करने का आरोप लगाते  हुए बताया कि दिनांक 21/3/ 2021 की रात तकरीबन 9 से 10 के बीच में मैं अपनी दुकान बंद करके घर जाने की तैयारी कर रहा था तभी हमें संदिग्ध गतिविधियां निरंजन मेडिकल में दिखाई दी तो मेरे द्वारा मेडिकल की दुकान के पास में जाकर दूर से फोटो व वीडियो  खींचने का प्रयास किया गया जिस पर फोटो खींचता देख निरंजन मेडिकल स्टोर का संचालक राहुल तिवारी आग बबूला हो गया और मा बहन की भद्दी भद्दी गालियां देते हुए मेरे मोबाइल को हाथ मारकर जमीन में गिरा दिया और मेरा गला दबाकर हाथापाई करने पर उतारू हो गए और मेरे आंखों में गाल में मुक्के मारना शुरू कर दिए इस मारपीट की घटना में पत्रकार मुकेश त्रिपाठी के एक  आंख की रोशनी चली गई है ठीक तरह से देख नही पा रहे है और चेहरे पर गंभीर चोट आई है पत्रकार मुकेश त्रिपाठी के द्वारा इस मारपीट की शिकायत समान थाने में लिखित रूप इस घटना के अगले दिन दे दी गई है और सामान पुलिस के द्वारा पत्रकार का एमएलसी भी जिला हॉस्पिटल में करवा लिया गया है मगर समान थाने की पुलिस के द्वारा शिकायत करने के 48 घंटे के बाद भी आरोपी के खिलाफ मुकदमा नहीं कायम किया गया और न हीं मारपीट करने बाले आरोपी राहुल तिवारी को गिरफ्तार किया गया  है पीड़ित पत्रकार मुकेश त्रिपाठी के द्वारा बताया गया कि निरंजन मेडिकल संचालक के द्वारा पूर्व से से ही कोरेक्स  एवं नशीली टैबलेट की बिक्री कि जा रही थी जिसका मेरे द्वारा कई बार विरोध किया गया और जब विरोध करने के बाद भी मेडिकल संचालक के द्वारा सुधार नहीं किया गया तो हो रहे कृत्य की फोटो एवं वीडियो बनाने का मेरे द्वारा  प्रयास किया गया है । मध्यप्रदेश शासन को पत्रकारों के मामलों को लेकर कोई ऐसे कड़े कानून बनाने की जरूरत है इससे इस प्रकार के आरोपी पत्रकारों से बदसलूकी एवं मारपीट ना कर सके वही पत्रकार मुकेश त्रिपाठी के द्वारा बताया गया कि इन लोगों से हमारी जान को खतरा भी है क्योंकि ऐसे कई मामले रीवा जिले में देखने में मिले हैं कि पत्रकारों की खुलेआम हत्या करवा दी गई है तो हमें भी डर है कहीं यह लोग हमारी भी हत्या ना करवा दें क्योंकि पुलिस प्रशासन तो हमारा साथ दे नहीं रहा है नेता मंत्री भी आरोपियों की सिफारिश करने से पीछे नहीं हट रहे हैं कहीं ना कहीं पुलिस पर राजनीतिक दबाव भी है जिसके चलते पुलिस कार्रवाई करने में विफल साबित हो रही है बीजेपी के शासन काल में गुंडाराज अराजकता का माहौल व्याप्त हो चुका है पुलिस भी नहीं कर पा रही है स्वतंत्र होकर अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही जब पत्रकार ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता का क्या होगा न जाने ऐसे कितने गुंडे रीवा में होंगे जो आए दिन आम नागरिक के साथ मारपीट की वारदात को अंजाम कर देते हैं और फिर पुलिस पर नेताओं से दबाव डालकर कार्यवाही न करने की बात कहते हैं ।

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