Monday, November 29, 2021

विश्वविद्यालय की भूमि पर बढ़ रहा अतिक्रमण, प्लाटिंग कर डाली

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रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय की भूमि पर अतिक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते कई वर्षों से चल रहे इस अतिक्रमण में विश्वविद्यालय के ही कुछ अधिकारियों का संरक्षण है तो कुछ ने चुप्पी साध रखी है। इनदिनों लॉकडाउन की वजह से जब पूरे शहर में हर जगह गतिविधियां ठप हैं तब भी विश्वविद्यालय की भूमि पर कब्जा करने का खेल लगातार जारी है। बीते कुछ दिनों के अंतराल में विश्वविद्यालय के हिन्दी भवन के पीछे के हिस्से में प्लाटिंग करने का कार्य जारी है। भूमाफिया से जुड़े लोग विश्वविद्यालय की भूमि को बिक्री करने के लिए सौदेबाजी कर रहे हैं। लगातार बिक्री के लिए लोगों को भूमि दिखाई जा रही है और नापजोख भी चल रही है। इन सबके बीच विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। इसके पहले से ही बड़ी मात्रा में विश्वविद्यालय के चारों हिस्सों में कब्जा हो चुका है, जिसे हटाने की केवल कागजी कार्रवाई चल रही है। बताया गया है कि गायत्री नगर के पास विश्वविद्यालय की भूमि पर कब्जा शुरू किया गया है। इसकी सूचना कुछ लोगों ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों को दी है लेकिन अधिकारियों की ओर से इस पर कोई कार्रवाई का प्रयास नहीं किया गया है। बल्कि लॉकडाउन का बहाना बनाया जा रहा है।

– अतिक्रमण की भूमि पर बैंक लोन भी ले रहे लोग
विश्वविद्यालय के अधिकारियों की उदासीनता की वजह से आसपास की भूमि पर जिन लोगों ने कब्जा कर रखा था, वह अब उन्हीं भूमियों पर मकान बनाने के लिए बैंकों से ऋण भी ले रहे हैं। भूमाफिया ने अपनी निजी भूमि बताकर विश्वविद्यालय की भूमि के बड़े हिस्से की रजिस्ट्री करा डाली है। बैंक लोन के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से कोई आपत्तियां नहीं आ रही हैं। बल्कि कुछ मामलों में लोगों के आपसी विरोध की वजह से शिकायतें कलेक्टर के पास तक पहुंची हैं।

– पूर्व में चिन्हित अतिक्रमण पर कार्रवाई नहीं
विश्वविद्यालय की भूमि पर पूर्व में अतिक्रमण चिन्हित किया गया था। जिसमें २२ लोगों को नोटिस भी जारी की गई थी। इन लोगों ने बड़े मकान बनाकर पूरी कालोनी तैयार कर डाली है। राजनीतिक दबाव की वजह से बीच में ही विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कार्रवाई को रोक दिया था। विश्वविद्यालय की भूमि से अतिक्रमण हटाने की लगातार मांग कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता बीके माला ने बताया कि जो अतिक्रमण चिन्हित हो चुके हैं उन्हें गिराने की कार्रवाई करने के बजाए जो भी अधिकारी यहां की जिम्मेदारी में होते हैं वह मिलीभगत करने लगते हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन से लगातार मांग की जा रही है, इनके द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने की स्थिति में कोर्ट की शरण में भी जाएंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के आसपास कई ऐसे भूमि स्वामी हैं जिन्होंने अपनी भूमि से अधिक का रकबा लोगों को बेचा है, इसकी जांच होना चाहिए कि यह अतिरिक्त रकबा आया कहां से है।


अतिक्रमणकारियों के लिए सड़क पहले ही दे चुके
अतिक्रमण कर लोगों ने मकान बनवा लिए और उन्हें अपने मकानों तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं थी। जिस पर विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के कारण विश्वविद्यालय ने अपनी भूमि से ही उन लोगों के लिए सड़क निकलवा दी है। हालांकि उस कालोनी में कई स्वयं की भूमि पर भी मकान बनाए हुए हैं लेकिन अधिकांश लोगों ने विश्वविद्यालय की भूमि पर ही मकान बना लिए हैं उनके पास स्वयं की भूमि का कोई दस्तावेज नहीं है।

अब निगरानी के लिए कमेटी बनाई
विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने एक बार फिर कागजी कार्रवाई की पूर्ति के लिए निगरानी कमेटी बनाई है। जिसमें कहा गया है कि अतिक्रमण को रोकने के साथ ही पूर्व से जिन लोगों ने कब्जा कर रखा है, उन्हें हटाने की कार्रवाई करेंगे। इस कमेटी में प्रमुख रूप से निर्माण विभाग के उपयंत्री अनुराग दुबे, उपयंत्री विद्युत यादवेन्द्र सिंह चौहान, सेवानिवृत्त सहायक यंत्री रमेश सिंह, वीके सिंह मानचित्रकार आदि को शामिल किया गया है।

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