Monday, November 29, 2021

विश्वविद्यालय में विवादित नियुक्तियों की फाइल गायब, मचा हड़कंप

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रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में विवादित नियुक्तियों से जुड़ी फाइल गायब हो गई है। यह कहां है इसका पता लगाने के लिए प्रबंधन जुटा है लेकिन हर अधिकारी, कर्मचारी एक-दूसरे पर ठीकरा फोडऩे का प्रयास कर रहा है। जिस तरह से यह फाइल महत्वपूर्ण है उस तरह से कुलपति-कुलसचिव भी इसकी तलाश नहीं करा रहे हैं।

इसलिए मामला संदिग्ध बनता जा रहा है। यह फाइल उन 84 कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ी है, जिनके लिए पद शासन से स्वीकृत कराए बिना ही विश्वविद्यालय ने नियुक्तियां कर दी थी। दैनिक भेतनभोगी के बाद इन्हें नियमित कर्मचारी भी बना दिया गया।

शासन ने इन कर्मचारियों को वेतन देने से हाथ खड़े किए तो अपने बजट से ही प्रबंधन भार उठा रहा है। इस मामले में लगातार शिकायतें की जा रही हैं, जिसकी वजह से शासन से जवाब मांगे जा रहे हैं। फाइल मौजूद नहीं होने की वजह से जवाब देने में भी आनाकानी की जा रही है। इस मामले में कई बार राजभवन और उच्च शिक्षा विभाग ने जानकारी मांगी है लेकिन विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा हीलाहवाली किए जाने की वजह से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है। जिसकी वजह से संबंधित कर्मचारियों का मामला वर्षों से अधर में लटका हुआ है।

कर्मचारी भी वर्षों सेवा देने के बाद अब चाहते हैं उनके पद शासन से स्वीकृत किए जाएं ताकि पेंशन योजना का लाभ उन्हें मिल सके। पूर्व में कर्मचारी संगठन अजाक्स ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था जिस पर विश्वविद्यालय से रिपोर्ट मांगी गई थी। उस दौरान अधूरी जानकारी भेजी गई थी और दोबारा कोई सूचना नहीं भेजी गई है।

आरोप है कि 84 पदों पर नियुक्तियां तो विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से की गई हैं लेकिन आरक्षण रोस्टर के नियमों की भी अनदेखी की गई है। शासन से पद स्वीकृत कराए बिना ही नियमित कर्मचारी के रूप में सेवाएं ली जा रही हैं।

– इस मामले से जुड़ी है फाइल

वर्ष 1988 से पहले विश्वविद्यालय ने 104 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की नियुक्ति की थी। इसमें 20 पद शासन से स्वीकृत हुए तो उन्हें समायोजित कर दिया गया। इसके बाद 27 मई 1995 को 84 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित कर दिया गया, जबकि इनके लिए शासन से पद ही स्वीकृत नहीं था। विश्वविद्यालय ने उस दौरान इन कर्मचारियों के वेतन की मांग शासन से की लेकिन वहां से इंकार कर दिया गया तो विश्वविद्यालय खुद के बजट से इनको भुगतान कर रहा है। इस नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, लगातार शिकायतें राजभवन एवं उच्च शिक्षा विभाग तक पहुंची हैं। जिन पर समय-समय पर जवाब भी तलब किया जा रहा है।

– पेंशन और अनुकंपा नियुक्तियां भी अटकी
विश्वविद्यालय की सेवा के बाद कर्मचारी रिटायर्ड भी होते जा रहे हैं। शासन द्वारा पेंशन का लाभ इन्हें नहीं मिल पा रहा है। जिसकी शिकायत लेकर ये रिटायर्ड कर्मचारी भटक रहे हैं। रिटायर होने वाले तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कार्य सहायक रामबहोर पटेल, कुक कुसुमकली, चौकीदार रामबहोर पटेल, रामभान सिंह, भृत्य सुदर्शन मिश्रा आदि को पेंशन नहीं मिल पा रही है। वहीं कई कर्मचारियों की सेवा के दौरान मौत भी हुई है। जिसमें ८४ नियुक्ति में भी कई शामिल हैं। इनके आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

– उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने का निर्देश भी नजरंदाज
बीते साल उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव को पत्र लिखकर मामले की गंभीरता पर विचार करने के लिए कहा था। जिसमें एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर हर बिन्दु पर विचार करते हुए पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा था। करीब एक वर्ष का समय बीत जाने के बाद भी विश्वविद्यालय की ओर से न तो कमेटी गठित की गई और न ही किसी तरह का पत्राचार ही शासन से किया गया है। अब कहा जा रहा है कि फाइल गायब होने की वजह से उक्त संबंध में जानकारी नहीं बनाई जा रही है। इस मामले में कुलपति राजकुमार आचार्य भी अपने को बचाने के प्रयास में हैं। वह किसी तरह के विवाद में उलझना नहीं चाह रहे हैं।
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कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ी जानकारी समय-समय पर शासन से मांगी जाती है और उसका जवाब भी भेजा जाता है। वर्तमान में फाइल की स्थिति क्या है, इसकी जानकारी हमें नहीं है। कार्मिक प्रभारी से जानकारी लेने के बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकता है।
लालसाहब सिंह, प्रभारी कुलसचिव विवि रीवा

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