Monday, October 25, 2021

नागपुर में IRS की ट्रेनिंग ले रही अहिंसा ने कहा- अधिक कोर्स के चक्कर में भटकने से अच्छा है कि लिमिटेड सब्जेक्ट पर ध्यान देकर एग्जाम क्रेक करें

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on telegram
Telegram

 

जबलपुर26 मिनट पहले

 

यूपीएससी की परीक्षा में जबलपुर की बेटी अहिंसा जैन को 53वीं रैंक मिली। - Dainik Bhaskar

यूपीएससी की परीक्षा में जबलपुर की बेटी अहिंसा जैन को 53वीं रैंक मिली।

संस्कारधानी की बेटी अहिंसा जैन ने लगातार दूसरे साल यूपीएससी की परीक्षा पास की है। 2020 में 164वीं रैंक आई थी। सहायक आयकर आयुक्त (प्रशिक्षण के तहत) वर्तमान में एनएडीटी, नागपुर में प्रशिक्षण ले रही अहिंसा ने अपने तीसरे प्रयास और लगातार दूसरे साल यूपीएससी की परीक्षा में शामिल हुई थीं। इस बार 53वीं रैंक मिली है।

दैनिक भास्कर से मोबाइल पर बात करते हुए अहिंसा जैन ने बताया कि आज यूपीएससी की तैयारी के लिए ढेर सारी सामग्री उपलब्ध है। ऐसे में भटकाव लाजिमी है। लेकिन लिमिटेड कोर्स का चयन कर अपनी ताकत और कमजोरी पर फोकस करते हुए यूपीएससी की परीक्षा को क्रेक किया जा सकता है। यूपीएससी की तैयारी कर रहे हर युवक-युवती को प्री, मेंस और इंटरव्यू की तैयारी गंभीरता से करनी चाहिए, तभी मनचाही रैंक मिल पाएगी। तैयारी करने वाले को ये पता होना चाहिए कि उसे क्या पढ़ना है और क्या नहीं पढ़ना है।

पिता सुभाष, मां अर्चना, भाई सुयश के साथ अहिंसा जैन।

पिता सुभाष, मां अर्चना, भाई सुयश के साथ अहिंसा जैन।

मां की प्रेरणा से मिली सफलता

अहिंसा जैन के “घर में कोई भी कॉम्पीटेटिव एग्जाम की राह पर नहीं था। चेरीताल निवासी भाई सुयश जैन सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। पिता सुभाषचंद जैन की जिनेंद्र गमछा भंडार नाम से दुकान है। मां अर्चना जैन गृहणी हैं। इस माहौल में पली बढ़ी अहिंसा जैन ने मां की प्रेरणा से यूपीएससी की राह चुनी। शुरू में यूपीएससी प्रिपरेशन का इरादा नहीं था, लेकिन मां चाहती थी कि यूपीएससी क्लीयर करूं, इसलिए एग्जाम पर फोकस किया।

अहिंसा जैन को 2020 में यूपीएससी में 164वीं रैंक मिली थी।

अहिंसा जैन को 2020 में यूपीएससी में 164वीं रैंक मिली थी।

पिछले वर्ष मिले 164वीं रैंक से खुश नहीं थी अहिंसा

अहिंसा ने बताया कि यूपीएससी के लिए कोचिंग दिल्ली से की थी। फिर डेढ़ साल जबलपुर में रहकर ही तैयारी की। 2020 में यूपीएससी के एग्जाम में 164वीं रैंक मिला और आईआरएस में चयन हुआ। नागपुर में अभी इसकी ट्रेनिंग चल रही है। ट्रेनिंग के पहले प्री और मेंस की परीक्षा दे चुकी थी। इंटरव्यू ट्रेनिंग के दौरान ही हुआ। पर पर्सनालिटी डेवलपमेंट में आईआरएस ट्रेनिंग का बड़ा फायदा मिला। रिजल्ट आया तो 53वीं रैंक मिली। ये मेरा तीसरा और आखिरी प्रयास था।

जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज की गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं यूपीएससी।

जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज की गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं यूपीएससी।

जेईसी में गोल्ड मेडलिस्ट

अहिंसा ने क्राइस्ट चर्च गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 12वीं पास की है। वहीं जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग डिग्री में गोल्ड मेडल हासिल किया। डेढ़ साल वे एटकिंस ग्लोबल बेंगलुरु में जॉब करती रहीं। 2015 से वे यूपीएससी की तैयारी करने दिल्ली चली गई थीं। फिर घर आकर डेढ़ साल तक तैयारी की। 2020 में 164वीं रैंक मिली। इस बार इसे सुधारते हुए 53वीं रैंक लाई हैं। अहिंसा जैन के मुताबिक उनकी सफलता में मां और परिवारजन के साथ ही आचार्य विद्यासागर महाराज का विशेष आशीर्वाद रहा है।

 

खबरें और भी हैं…

Source link

close