Monday, November 29, 2021

रैगांव विधानसभा सीट पर कब्जा जमाए रखना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती

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-दिवंगत पूर्व विधायक के परिवार में ही मची है रस्साकसी
-दो-दो महिलाओं ने नेतृत्व को दी चुनौती

सतना. रैगांव विधानसभा उपचुनाव के लिए अब सरगर्मी तेज हो गई है। प्रमुख प्रतिद्वंद्वी दलों कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने अपने-अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। इसके तहत कांग्रेस ने जहां एक फिर से 2018 विधानसभा चुनाव की उपजेता कल्पना वर्मा पर भरोसा जताया है, वहीं बीजेपी ने पिछले चुनाव में इस सीट से विधायक चुने गए जुगुल किशोर बागरी परिवार से ही प्रतिमा बागरी को टिकट दिया है। लेकिन प्रतिमा के उम्मीदवार घोषित होते ही बारगी परिवार में ही बगावत के बादल छा गए हैं। एक परिवार से चार-चार लोगों के नामांकन पत्र खरीदने के बाद सियासत गर्म हो गई है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो ऐसे में भाजपा नेतृत्व के लिए इस सीट पर कब्जा कायम रखना बड़ी चुनौती हो सकती है।

बता दें कि रैगांव सुरक्षित सीट पर 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कल्पना वर्मा और भाजपा के जुगुल किशोर बारगी के बीच टक्कर रही जिसमें बारगी ने कल्पना को पराजित कर सीट पर कब्जा जमाया था। वैसे हार के बाद भी लंबे अरसे बाद इस आरक्षित सीट पर कांग्रेस दूसरे नंबर पर रहते हुए एक तरह से बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व ने उन पर दोबारा भरोसा जताया है। कल्पना एमएससी (गणित) हैं और उनके दादा ससुर विधायक रह चुके हैं। उधर भाजपा प्रत्याशी प्रतिमा वर्मा, सतना जिला संगठन की महामंत्री हैं और इससे पहले महिला मोर्चा की महामंत्री रह चुकी हैं। उनके पिता जयप्रताप बागरी व मां कमलेश बागरी पूर्व जिला पंचायत सदस्य हैं। वह बीए एलएलबी हैं।

प्रतिमा को भाजपा ने पहली बार प्रत्याशी बनाया है। प्रतिमा के पिता जयप्रताप बागरी व मां कमलेश बागरी दोनों ही एक ही कार्यकाल में जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए थे। बाद में जय प्रताप नगर पालिक निगम सतना के वार्ड 19 से भाजपा के टिकट पर पार्षद भी बने। हालांकि प्रतिमा की बतौर सामाजिक कार्यकर्ता अच्छी छवि है। पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में भी उनका अच्छा-खासा अनुभव है। लेकिन चुनावी राजनीति के लिए वह नई बताई जा रही हैं। वैसे पार्टी की सोच है कि नया प्रत्याशी देने से विपक्ष को प्रहार करने का मौका नहीं मिलेगा।

लेकिन प्रतिमा को प्रत्याशी बनाए जाने से पार्टी के अंदर ही घमासान मच गया है। पूर्व विधायक स्व. जुगुल किशोर बागरी के बड़े पुत्र पुष्पराज समर्थकों ने तो बगावती तेवर अख्तियार कर लिया है। वो प्रतिमा को हवाई उम्मीदवार करार दे रहे हैं। इस बीच पुष्पराज बागरी ने छोटे भाई देवराज के लिए भी नामांकन फार्म खरीदा। इस दौरान बीच पुष्पराज बागरी ने मीडिया को बताया कि उन्हें तो सहज विश्वास ही नहीं हो रहा कि पार्टी ने उन्हें दरकिनार कर किसी और को टिकट दे दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी वक्त है और पार्टी प्रत्याशी चयन पर पुनर्विचार कर सकती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर पूरा भरोसा जताया फिर भी यह कहने से नहीं चूके कि पार्टी ने जिस तरह से बिल्कुल नया उम्मीदवार दिया है उससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। उनका कहना है कि इस नए चेहरे को कोई नहीं जानता। उन्होंने यह भी कहा कि वो खुद पार्टी नेतृत्व के संकेत मिलने पर ही एक अक्टूबर को ही पर्चा खरीद चुके हैं। उसके बाद बहु वंदना बागरी, फिर अब छोटे भाई देवराज बागरी के लिए भी वे नामांकन फार्म लेने खुद ही आए हैं।

हालांकि पारिवारिक कलह के मुद्दे पर पुष्पराज का कहना था कि चुनाव लड़ने के परिवार के लोग अलग-अलग टिकट की दावेदारी भले कर रहे हों पर टिकट फाइनल होने के बाद सब एकजुट हो कर पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में जुट जाएंगे। लेकिन इस बीच रानी बागरी के भी नामांकन फार्म लेने के बाद सियासत तेज हो गई है। रानी ने मीडिया से कहा कि वह तमाशे के लिए यहां नहीं आई हैं।

ऐसे में सियासी पंडितों का कहना है कि भले ही भाजपा नेतृत्व आगे चल कर सब कुछ पार्टी के नाम पर सही कर ले पर बागरी परिवार ने फिलहाल जो माहौल पैदा किया है, उसमें पार्टी के लिए अपनी सीट पर कब्जा कायम रख पाना आसान नहीं होगा।

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