Monday, November 29, 2021

Satna News:- कैसे करें गुजारा | दाल-सब्जी से लेकर रसोई गैस तक में महंगाई की आग

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महंगाई के तगड़े डोज से आम आदमी का जीना मुहाल, रोजमर्रा की चीजें जुटाने में टूट रही आम आदमी की कमर

रोजमर्रा की वस्तुओं के बढ़ते दामों ने आम जनमानस के जीवन को हलाकान कर रखा है। हालात यह है कि पेटोल-डीजल हो या खाद्य तेल तकरीबन सभी इतने महंगे हो रहे हैं कि इनका उपयोग करना आम जनमानस के लिए तकलीफदेह साबित हो रहा है। स्थिति यह है कि पिछले दो सालों में यदि यह देखना हो कि कौन सी वस्तु महंगाई की मार से अछूती है तो उस वस्तु का नाम याद आना मुश्किल हो जाएगा। किस ट्रेड में महंगाई का झटका नहीं लग रहा यह खोजना हो तो मुश्किल आएगी। इस संबंध जब स्टार समाचार ने आम जनमानस से चर्चा की तो उनका दर्द सामने आ गया।

इनके दामों ने रुलाया

पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस इन दो सालों में पेट्रोलियम पदार्थों ने उपभोक्ता को महंगाई का तगड़ा डोज दिया है। दो साल पहले आज ही के दिन सतना में पेट्रोल 82.53 रुपये लीटर था जो आज करीब 35 रुपये बढ़कर 116.70 रुपये है। डीजल भी 32 रुपये लीटर बढ़ा है जो पहले 73.83 था और आज 105.72 रुपये है। रसोई गैस तो 632 रुपये थी और इसमें भी खाते में वापस करीब 100 रुपये आते थे। आज 300 रुपये बढ़कर 932 पर है और सबसिडी भी नहीं मिलती।

खाद्य तेल पेट्रोललियम पदार्थों की तरह खाद तेलों ने भी उपभोक्ता को गहरी चोट दी है। पिछसे साल डेढ़ साल में सरसों का तेल फुटकर में 90-100 रुपये लीटर से बढ़कर 200-250 रुपये पर है। अन्य खाद्य तेलों की कीमतें प्रतिशत तक बढ़ी हैं। 175

दाल-सब्जी भी महंगी इन दिनों हर तरह की दालें ही नहीं प्याज टमाटर भी आंख दिखा रहे हैं। हालांकि अभी तक • इनने अपने उच्चस्तर को नहीं हुआ पर ● मौजूदा समय जो स्थिति है ये कभी भी रुला सकती है।

महंगाई इस मार से हाई क आहत किसान और आम आदमी है। महंगा डीजल, महंगी खाद से किसान की कमर टूट रही है। जो मजदूरी करके पेट पालता है वह सिर्फ खाने के लिये ही कमा रहा है। केन्द्र सरकार को महंगाई पर नियंत्रण करना चाहिये।

शीवेन्द्र सिंह प्रगतिशील किसान

आज महगाई की मार से कोई अछूता नहीं है। घर गृहस्थी चलाने वाली हर गृहिणी महंगाई की वजह से घर की व्यवस्था में कई बदलाव करने को मजबूर है। महंगाई का सबसे अधिक कुप्रभाव मध्यम वर्ग की रसोई पर देखने को मिल रहा है।

अपर्णा अग्रवाल, गृहणी व अध्यक्ष मारवाड़ी

रोजमरां जरूरत से लेकर अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें इन दो सालों में दो गुना तक बढ़ी हैं। दवाइयों व स्वास्थ्य संबंधी उपकरणों की स्थिति काफी दयनीय है। उच्च आय वर्ग के लोग तो महंगाई को सह रहे हैं पर मध्यम और निम्न आय वर्ग की हालत खराब है।

दिलीप द्विवेदी ग्रामीण

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